कल का दिन वैसे तो आम दिनों जैसा ही बोरिंग बीता, पर शाम पूरी तरह दिलचस्प थी। कभी-कभी वाकई ब्लेस्ड फील करती हूँ कि मैं लड़की हूँ, क्योंकि हरकतें ही ऐसी होती हैं। पहले मुझे लगा कि वह पूर्वोत्तर भारत से है। उसे देखा, शायद बीस सेकंड से ज्यादा देखा होगा। वह मुस्कुराया, और मैं थोड़ा घूरते हुए वहीं रह गई। फिर मेरे घूरने को तोड़ते हुए जिनू ने “हैलो” कहा। मैंने हैलो नहीं कहा, बस पूछा, “मणिपुर और मिजोरम?” उसने अपनी मुस्कुराहट को हंसी में बदलकर कहा, “साउथ कोरिया।”
अच्छा तुम वही हो… खुशी तुम्हारे ही बारे में बात करती है । दूसरे ही क्षण याद आया, खुशी बीटीएस के बारे में बात करती है यार… (यह सब सिर्फ सोचा) .
ओह…! “आप पढ़ाई कर रहे हैं?” मैंने पूछा। जिनू ने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं, मेरा रेस्टॉरेंट है।” “ओह कहाँ?” मैंने उत्सुक होकर पूछा। लाजपत, दिल्ली… सियोल कैफे। फिर आधा उत्साहित, आधा मोहित, उसका नंबर लिया और कहा, “हम आपके रेस्टॉरेंट आएंगे।” उसने हंसते हुए कहा, “या श्योर।”
इतने में एक कदम आगे फोन में नंबर सेव करते निकल ही रही थी कि अचानक मुड़ी और पूछा, “वैसे हैलो को कोरिया में क्या कहते हैं?” पूछते वक्त और रिप्लाई आने के मध्य खुद के अंदर से जवाब आया, “गूगल कर ले बहन,” फिर सामने से आवाज़ आई- अन्न्योंग हसेयो! (याद नहीं है, गूगल किया है)क्या??? मैंने दुबारा पूछा।उसने दुबारा बताया। तीसरी बार जाकर तो सुन पाई, फिर समझ आया कि जो चीजें जिसे हम नहीं जानते, न तो उन्हें देख पाते हैं ना सुन पाते हैं…।आगे, हमने पाँच बार साथ में अभ्यास किया। छठी बार में जिनू को जरूर अपना रेस्टॉरेंट याद आया होगा, उसने कहा, “या साउंड सिमिलर…”
हम दोनों हँस पड़े। खैर, हमारी हँसी की भाषा एक ही थी।
खैर, सियोल रेस्टॉरेंट के साथ सियोल बेकरी (आइज़ॉल) और बेकरी में लगाए चक्कर भी याद आए।
अब सवाल यह है कि रेस्टॉरेंट का नाम ‘सियोल’ क्यों है? क्या वे साउथ कोरिया के सियोल सिटी से है? हो सकता है। फिर कभी मिलने का मौका मिला तो ज़रूर पूछूंगी, और यह भी कि उसने भारत ही क्यों चुना। और हाँ, बात करें जिनू के नाम की। तो उसका पूरा नाम ‘ओह जिनू’ है, जिसमें ‘ओह’ सरनेम है और ‘जिनू’ पहला नाम। जिनू का मतलब है “वह व्यक्ति जो परिवार की संपत्ति और समृद्धि को आगे बढ़ाए।” जो कि जिनू कर रहें हैं।
और इस तरह हमें अपने इर्द-गिर्द के बच्चों के लिए कुछ नए नाम मिले।



